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मसूड़ों से खून आना (Bleeding Gums) का इलाज — बयाज़े कबीर के पारंपरिक नुस्खे

मसूड़ों से खून आना (Masudo Se Khoon Aana) रोकने के पारंपरिक नुस्खे — बयाज़े कबीर, जिल्द 1 के अनुसार मंजन, गरगरा और घरेलू उपाय आसान हिंदी में।

⏰ 6 min read  |  ✅ Baya-e-Kabir Verified Source  |  📅 Last Updated: 15 Oct 2026

अंतिम अपडेट: 14 अक्तूबर 2026

  • ग्रंथ में नाम: मसूढ़ों से ख़ून आना (Bleeding Gum)
  • ग्रंथ की सलाह: नीचे दिए नुस्खों में से कोई एक तैयार करके इस्तेमाल करना
  • मुख्य तरीके: मंजन (सुनून), गरगरा (कुल्ला), और चाटने/पीने वाली दवा
  • स्रोत: बयाज़े कबीर, जिल्द 1, पृष्ठ 109-110

मसूड़ों से खून आना (Masudo Se Khoon Aana) — अगर ब्रश करते वक़्त या यूं ही मसूड़ों से खून आने लगता है, तो बयाज़े कबीर में इसके लिए साफ़ नुस्खे दर्ज हैं। ग्रंथ इसे सीधे “मसूढ़ों से ख़ून आना” कहता है, और इलाज के लिए मंजन, गरगरा (कुल्ला) और एक चाटने वाली दवा — तीनों तरीके एक साथ बताता है। इस पेज पर masudo se khoon aana के इन पारंपरिक नुस्खों को सामग्री, मात्रा और इस्तेमाल के तरीके के साथ आसान भाषा में समझाया गया है।

बयाज़े कबीर में क्या लिखा है — मसूड़ों से खून आना (Masudo Se Khoon Aana)

ग्रंथ के दो पन्नों (109-110) पर पूरा इलाज दिया गया है — मंजन से शुरू होकर गरगरा तक। नीचे जस का तस दिया गया है, जहां शब्द अस्पष्ट हैं वहां साफ़ बताया गया है।

पृष्ठ 109:

“मसूढ़ों से ख़ून आना (BLEEDING GUM) — नीचे लिखे नुस्खों में से कोई एक नुस्ख़ा तैयार करके इस्तेमाल कराना बहुत मुफ़ीद है।

(1) नुस्ख़ा:- सुनून:- फिटकरी 6 माशा, को कड़छे में डाल कर जलायें, जलने के दौरान सिरका ख़ालिस छिड़कते जायें, जब वह ख़ुश्क हो जाये तो दोबारा छिड़कें और इसी तरह तीन बार करें। इसके बाद गुलनार 3 माशा, हीरा कसीस 3 माशा मिला कर सुनून (मंजन) बनायें।

(2) नुस्ख़ा:- फिटकरी बिरयॉ, तूतियॉ बिरयॉ, तबाशीर, मस्तगी, कत्था सफेद, कुहर बाचे शमई हर एक 3 माश, इन सबको कूट-छान कर मंजन बनायें और सुबह-शाम दॉतों पर मलें, और नीचे लिखी दवायें गरगरे के तौर पर इस्तेमाल करायें।”

पृष्ठ 110 (गरगरे और आगे की दवा):

“(1) नुस्ख ग़रग़रा:- नमक तआम 40 तोला पानी में मिलाकर गरगरा करें।

(2) नुस्ख़ा गरगरा:- फिटकरी [मात्रा अस्पष्ट] 40 तोला पानी में मिलाकर गरगरा करें और चाटने के लिये यह नुस्ख़ा दें।

नुस्ख़ा:- गेरू, संग जराहत, दमुल अख़दैन, बुस्द सोख्ता, कोहरबा शमई, तबाशीर हर एक 1 माशा, इन सबको बारीक पीस कर शरबत अंजबार 4 तोला में मिलाकर थोड़ा-थोड़ा दिन में चटायें। अगर ज़रूरत समझें तो पीने के लिये यह नुस्ख़ा इस्तेमाल रायें: गेरू, संग जराहत, दमुल अख़वैन, हर एक 1 माशा, बारीक पीस कर एक मुरब्बा आमला में मिलाकर खिलायें, ऊपर से शरबत अनार शीरीं 4 तोला पानी में मिलाकर पिलायें, और गिज़ा के बाद काफूरे सय्याल 6-6 क़तरे दें।”

अस्पष्टता संबंधी नोट (कोई अंदाज़ा नहीं लगाया गया):

  • “हीरा कसीस”, “फिटकरी बिरयॉ”, “तूतियॉ बिरयॉ”, “कुहर बाचे शमई”, “संग जराहत”, “बुस्द सोख्ता”, “शरबत अंजबार” — इनका सटीक आधुनिक/प्रचलित नाम ग्रंथ से पुष्टि नहीं हो सकता, इन्हें जस का तस रखा गया है।
  • “दमुल अख़दैन” और “दमुल अख़वैन” — ग्रंथ में दोनों जगह अलग-अलग स्पेलिंग है, इसलिए हमने दोनों वर्तनी वैसी ही रखी है।
  • दूसरे गरगरा नुस्खे में फिटकरी की मात्रा पृष्ठ पर स्पष्ट नहीं दिखती।

मसूड़ों से खून आना (Masudo Se Khoon Aana) - बयाज़े कबीर पृष्ठ 109 का मूल पन्ना
बयाज़े कबीर, जिल्द 1, पृष्ठ 109
मसूड़ों से खून आना (Masudo Se Khoon Aana) - बयाज़े कबीर पृष्ठ 110 का मूल पन्ना
बयाज़े कबीर, जिल्द 1, पृष्ठ 110

आसान भाषा में समझें

ग्रंथ masudo se khoon aana (मसूड़ों से खून आने) का इलाज तीन तरीकों से करने को कहता है:

  1. मंजन (दांतों पर मलने वाला पाउडर) — दो अलग रेसिपी दी गई हैं
  2. गरगरा (कुल्ला) — नमक-पानी या फिटकरी-पानी से
  3. चाटने/पीने वाली दवा — जो ज़्यादा ज़रूरत होने पर दी जाती है

ग्रंथ खुद कहता है कि इनमें से कोई एक नुस्खा अपनाना काफ़ी है — सारे एक साथ करना ज़रूरी नहीं बताया गया।

नुस्खों की सामग्री

1. सुनून (मंजन) — पहला नुस्खा

क्रमसामग्रीमात्रा
1फिटकरी (जली हुई, सिरके के साथ)6 माशा
2गुलनार3 माशा
3हीरा कसीस*3 माशा

2. मंजन — दूसरा नुस्खा

क्रमसामग्रीमात्रा
1फिटकरी बिरयॉ*3 माशा
2तूतियॉ बिरयॉ*3 माशा
3तबाशीर3 माशा
4मस्तगी3 माशा
5कत्था सफेद3 माशा
6कुहर बाचे शमई*3 माशा

3. गरगरा (कुल्ला)

क्रमनुस्खातरीका
1नमक तआम40 तोला पानी में मिलाकर
2फिटकरी40 तोला पानी में मिलाकर (मात्रा अस्पष्ट)

4. चाटने/पीने वाली दवा

क्रमसामग्रीमात्रा
1गेरू1 माशा
2संग जराहत*1 माशा
3दमुल अख़दैन/अख़वैन*1 माशा
4बुस्द सोख्ता*1 माशा
5कोहरबा शमई*1 माशा
6तबाशीर1 माशा

(जिन नामों के आगे * है, उनका सटीक आधुनिक नाम ग्रंथ से पुष्टि नहीं हो सकता)

बनाने और इस्तेमाल का तरीका

  • मंजन इस्तेमाल: सुबह-शाम दांतों पर मलें
  • गरगरा इस्तेमाल: ऊपर बताए नमक या फिटकरी के पानी से कुल्ला करें
  • चाटने वाली दवा: सामग्री बारीक पीसकर शरबत अंजबार (4 तोला) में मिलाकर, दिन में थोड़ा-थोड़ा चटाएं
  • पीने वाला विकल्प (अगर ज़रूरत हो): गेरू + संग जराहत को पीसकर मुरब्बा आमला में मिलाकर खिलाएं
  • ऊपर से शरबत अनार (4 तोला पानी में मिलाकर) पिलाएं
  • खाने के बाद काफूरे सय्याल (तरल कपूर) की 6-6 बूंदें दें

पारंपरिक जानकारी और आधुनिक दृष्टिकोण

पारंपरिक स्रोत क्या कहता है? ग्रंथ मंजन, गरगरा और चाटने वाली दवा — तीनों तरीकों से मसूड़ों के खून को रोकने की बात करता है।

आसान आधुनिक समझ: नमक-पानी और फिटकरी-पानी से कुल्ला करना आमतौर पर मुँह की सफ़ाई से जुड़े घरेलू उपायों में जाना-पहचाना तरीका है।

मसूड़ों से खून आना (masudo se khoon aana) कब गंभीर माना जाता है? NHS के अनुसार ब्रश करते समय या सख़्त चीज़ें खाते समय मसूड़ों से खून आना gum disease (मसूड़ों की बीमारी) का एक लक्षण हो सकता है, और ऐसे में dentist को दिखाने की सलाह दी जाती है। इसलिए पारंपरिक नुस्खे डेंटल जांच का विकल्प नहीं हैं।

क्या अभी पुष्टि नहीं की जा सकती? इस लेख की सामग्री मुख्य रूप से पारंपरिक ग्रंथ बयाज़े कबीर पर आधारित है। इसलिए यहां किसी आधुनिक वैज्ञानिक प्रभाव, क्लिनिकल असर या इलाज के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा रही है।

स्रोत संदर्भ

स्रोत: बयाज़े कबीर, जिल्द 1, पृष्ठ 109-110 — प्रदान की गई पुस्तक छवियों के आधार पर। पारंपरिक यूनानी चिकित्सा पद्धति के बारे में अधिक जानकारी के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ यूनानी मेडिसिन (NIUM) जैसी संस्थाओं से संपर्क करें। हमारे बाकी स्रोतों की जानकारी के लिए Our Sources पेज देखें। हमारे बारे में अधिक जानने के लिए About Us पेज पर जाएं।

अगर आप ऐसी ही और सेहत से जुड़ी पारंपरिक जानकारी में रुचि रखते हैं, तो हमारा Health & Nutrition सेक्शन देखें — वहां और भी कई ग्रंथ-आधारित लेख मिलेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मसूड़ों की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?
ग्रंथ किसी एक दवा को “सबसे अच्छा” नहीं बताता — बल्कि मंजन, गरगरा और चाटने वाली दवा में से कोई एक अपनाने की सलाह देता है (ऊपर टेबल देखें)।

मसूड़ों से खून आने पर घर पर क्या कर सकते हैं?
ग्रंथ के अनुसार नमक या फिटकरी के पानी से गरगरा (कुल्ला) करना एक आसान तरीका है। बाकी नुस्खों के लिए सामग्री जुटानी पड़ेगी।

बयाज़े कबीर में masudo se khoon aana का इलाज कहां लिखा है?
बयाज़े कबीर, जिल्द 1, पृष्ठ 109-110 पर, जहां इसे “मसूढ़ों से ख़ून आना (Bleeding Gum)” नाम से दर्ज किया गया है।

क्या सारे नुस्खे एक साथ करना ज़रूरी है?
नहीं। ग्रंथ खुद कहता है कि दिए गए नुस्खों में से कोई एक तैयार करके इस्तेमाल करना मुफ़ीद है।

मसूड़ों से खून आने पर dentist के पास कब जाना चाहिए?
NHS के अनुसार ब्रश करते समय या सख़्त चीज़ें खाते समय मसूड़ों से खून आए, तो dentist को दिखाना चाहिए। खून लगातार आए या दर्द और सूजन साथ हो, तो सिर्फ़ घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें।

महत्वपूर्ण चिकित्सा सूचना

ये लेख मसूड़ों से खून आना (Masudo Se Khoon Aana) पर सिर्फ़ शैक्षणिक और सूचनात्मक मकसद से लिखा गया है। इसमें दी गई पारंपरिक जानकारी बयाज़े कबीर के पन्नों पर आधारित है, इसे आधुनिक चिकित्सा निदान, इलाज या वैज्ञानिक प्रमाण के बराबर न समझें। अगर मसूड़ों से खून लगातार आ रहा हो, दर्द या सूजन के साथ हो, तो सिर्फ़ इस जानकारी के आधार पर घर पर इलाज करने की बजाय किसी योग्य डेंटिस्ट या डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।


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— Ayurveda Unani Gyan Team

1 thought on “मसूड़ों से खून आना (Bleeding Gums) का इलाज — बयाज़े कबीर के पारंपरिक नुस्खे”

  1. Mere bhi masodo se khoon ata hai 😅 kya sach Mein yah nuks kaam ayega mere aap Bataao isko istemaal kar ke dekha jaye kya

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