अंतिम अपडेट: 13 सितंबर 2026
- ग्रंथ में नाम: भूख की कमी (Anorexia)
- मुख्य कारण: पेट की पुरानी सूजन/ज़ख्म, या तेल-घी वाली भारी चीज़ों का ज़्यादा इस्तेमाल
- मुख्य इलाज: कारण के हिसाब से अलग-अलग यूनानी नुस्खे (जवारिश ऊद तुर्श, जवारिश जालीनूस, हब्बे किबरीत)
- खान-पान: हल्का, जल्दी हज़्म होने वाला भोजन — बकरी का शोरबा, मूंग-अरहर की दाल, मुर्ग़ का शोरबा
- स्रोत: बयाज़े कबीर, जिल्द 1, पृष्ठ 196-198
भूख न लगना (Bhookh Na Lagna) — अगर खाने का मन ही नहीं करता, या पेट भरा-भरा सा लगता है, तो अकेले आप नहीं हैं। बयाज़े कबीर (जिल्द 1) में हकीमों ने इसे भूख की कमी कहा है, और इसके पीछे दो सीधी वजहें बताई हैं — या तो पेट में कोई पुरानी सूजन/ज़ख्म, या भारी-तैलीय खाने की आदत। नीचे ग्रंथ का पूरा नुस्खा और सही खान-पान का तरीका, जस का तस दिया गया है।
बयाज़े कबीर में क्या लिखा है
📌 शुरुआत में एक ज़रूरी बात: भूख की कमी वाला हिस्सा पृष्ठ 196 के आख़िर में शुरू होकर पृष्ठ 198 तक चलता है — बीच में आने वाले सारे नुस्खे इसी विषय के इलाज हैं, अलग टॉपिक नहीं।
पृष्ठ 196 (आख़िरी हिस्सा) — कारण:
“अगर मुज़म्मिन वर्मे मैदा या मेअदे के ज़ख्म वगैरह की वजह से हो तो उसका इलाज आगे बयान किया जायेगा। अगर रौगनी व चिकनी गिज़ाओं का इस्तेमाल मरज़ की वजह हो, ऐसी गिज़ाओं का इस्तेमाल बन्द कर दें और नीचे लिखे नुस्खों में से कोई नुस्खा इस्तेमाल करायें।”
पृष्ठ 197 — नुस्खे:
“जवारिश ऊद तुर्श 5 माशा, पहले खिलाये। ऊपर से शीरा बादयान 3 माशा, शीरा ज़िरशक 3 माशा, शीरा आलू बुख़ारा 5 दाना, अर्क़े बादयान 12 तोला में निकाल कर सिकंजबीन 2 तोला मिला कर दें, और खाने के बाद सुफूफे नअनाअ 3 माशा खिला दिया करें।
सुफूफे नअनाअ:- पौदीना खुश्क 11 माशा, गर्दे सुमाक़ साढ़े पॉच माशा, नमक तआम साढ़े पॉच माशा, मिर्च सियाह 7 माशा, कूट छान कर सुफूफ बनायें और दिन में चन्द बार नीचे लिखी चटनी चटायें।
चटनी:- ज़हर मुहरा, तबाशीर, गर्दे सुमाक, अनार दाना, पौदीना खुश्क, पोस्त तुरंज हर एक 1 माशा, सबको पीस कर सिकंजबीन 2 तोला या शरबते अनार 2 तोला में मिला कर चटाये। यह मिक़दार दिन भर के लिए काफी है। अगर सकील (देरहज़्म/भारी), नफ्फास (रियाह पैदा करने वाली) और देर हज़्म चीज़ों के इस्तेमाल की वजह से मरज़ हुआ हो तो नीचे वाला नुस्खा दें।
नुस्ख़ा:- जवारिश जालीनूस पहले खिलाये। ऊपर से शीरा बादयान, शीरा मुवैज़ मुनक़्क़ा, शीरा तुख़्में (?) हर एक 5 माशा, अर्क़े बादयान 12 तोला में निकाल कर और गुलकंद 4 तोला मिला कर पिलायें। खाने के बाद हब्बे किबरीत 2-2 अदद दें, और शाम को माजूने नानख़ाह 5 माशा, अर्क़े बादयान 12 तोला के साथ देते रहें।
नुस्ख़ा-ए-हब्बे किबरीत:- गन्धक आमला सार साढ़े पॉच माशा, फिलफिले सियाह साढ़े पॉच माशा, नमक तआम पौने दो माशा, कूट छान कर लीमूँ के अर्क़ में गूँध कर चने के बराबर गोलियॉ बनायें।
अगर हज़्म की ख़राबी की वजह से मरज़ पैदा हुआ हो तो उसका इलाज पहले गुज़र चुका है। अगर ज़्यादा शराब पीने से मरज़ हुआ हो तो आहिस्ता-आहिस्ता शराब का इस्तेमाल बन्द करा दें और ऊपर लिखा जवारिश ऊद तुर्श वाला नुस्खा इस्तेमाल करायें। इसी तरह अगर अस्बी (पट्ठों) की कमज़ोरी की वजह से हो तो जवारिश जालीनूस वाला नुस्खा दें।”
पृष्ठ 198 — खान-पान:
“गिज़ा व परहेज़:- मरज़ के शुरू में गिज़ा कमी के साथ दें और मुक़र्रह वक़्त पर दिया करें, गिज़ा हल्की, जल्द हज़्म होने वाली हो, फिर आहिस्ता-आहिस्ता गिज़ा में ज़्यादती करते रहें। बकरी का शोरबा, मूँग की दाल, अरहर की दाल, मुर्ग़ का शोरबा, मूँग की खिचडी वग़ैरह अच्छी गिज़ायें हैं। सकील (देरहज़्म/भारी), रियाह पैदा करने वाली और देर हज़्म चीज़ों से परहेज़ करायें और कब्ज़ न होने दें। सुबह-शाम की चहल क़दमी, जो खुली हवा में की जाये, इस हालत में बहुत मुफीद साबित होती है।”
📌 अस्पष्टता संबंधी नोट (कोई भी अंदाज़ा नहीं लगाया गया है):
- “शीरा ज़िरशक” — ये संभवतः ज़िरिश्क (बार्बेरी) का शीरा हो सकता है, लेकिन ग्रंथ में सिर्फ़ नाम दिया गया है, पुष्टि नहीं की जा सकती।
- “शीरा तुख़्में (?)” — इस शब्द के आगे का हिस्सा छपाई में स्पष्ट नहीं है, इसे पूरा नहीं जोड़ा गया है।
- “ज़हर मुहरा”, “माजूने नानख़ाह” के सटीक घटक इस पन्ने पर नहीं दिए गए — केवल नाम मौजूद है।
- “हज़्म की ख़राबी” का इलाज ग्रंथ के किसी पिछले पन्ने पर है, जो हमें उपलब्ध नहीं कराया गया — इसलिए वो विवरण यहाँ नहीं दिया जा सकता।



आसान भाषा में समझें
भूख न लगना (Bhookh Na Lagna) के पीछे ग्रंथ के मुताबिक दो मुख्य वजहें हो सकती हैं — या तो पेट में कोई पुरानी सूजन/ज़ख्म, या तेल-घी वाली भारी चीज़ों का ज़्यादा सेवन। इलाज भी उसी हिसाब से बदलता है:
- अगर सामान्य कमज़ोरी है → जवारिश ऊद तुर्श + सुफूफे नअनाअ + चटनी
- अगर भारी/गैस बनाने वाली चीज़ों से हुआ है → जवारिश जालीनूस + हब्बे किबरीत
- अगर ज़्यादा शराब पीने से हुआ है → शराब धीरे-धीरे बंद करें + जवारिश ऊद तुर्श
- अगर पट्ठों (मांसपेशियों/नसों) की कमज़ोरी से हुआ है → जवारिश जालीनूस
यानी ग्रंथ एक ही जवाब नहीं देता, बल्कि कारण पहचान कर अलग-अलग नुस्खा बताता है।
कारण के हिसाब से नुस्खा — एक नज़र में
| अगर वजह ये हो | ग्रंथ के अनुसार नुस्खा |
|---|---|
| सामान्य भूख की कमी | जवारिश ऊद तुर्श + सुफूफे नअनाअ + चटनी |
| भारी/देर-हज़्म/गैस बनाने वाली चीज़ों का सेवन | जवारिश जालीनूस + हब्बे किबरीत + माजूने नानख़ाह |
| ज़्यादा शराब पीना | शराब धीरे-धीरे बंद करें + जवारिश ऊद तुर्श |
| पट्ठों (मांसपेशियों/नसों) की कमज़ोरी | जवारिश जालीनूस |
| हज़्म की ख़राबी | ग्रंथ के किसी पिछले पन्ने पर — यहाँ उपलब्ध नहीं |
नुस्खों की सामग्री
1. जवारिश ऊद तुर्श वाला संयोजन
| क्रम | सामग्री | मात्रा |
|---|---|---|
| 1 | जवारिश ऊद तुर्श | 5 माशा |
| 2 | शीरा बादयान | 3 माशा |
| 3 | शीरा ज़िरशक* | 3 माशा |
| 4 | शीरा आलू बुख़ारा | 5 दाना |
| 5 | अर्क़े बादयान | 12 तोला |
| 6 | सिकंजबीन | 2 तोला |
2. सुफूफे नअनाअ
| क्रम | सामग्री | मात्रा |
|---|---|---|
| 1 | पौदीना खुश्क (सूखी पुदीना) | 11 माशा |
| 2 | गर्दे सुमाक़ | साढ़े पॉच माशा |
| 3 | नमक तआम (सादा नमक) | साढ़े पॉच माशा |
| 4 | मिर्च सियाह (काली मिर्च) | 7 माशा |
3. चटनी
| क्रम | सामग्री | मात्रा |
|---|---|---|
| 1 | ज़हर मुहरा* | 1 माशा |
| 2 | तबाशीर | 1 माशा |
| 3 | गर्दे सुमाक | 1 माशा |
| 4 | अनार दाना | 1 माशा |
| 5 | पौदीना खुश्क | 1 माशा |
| 6 | पोस्त तुरंज (तुरंज का छिलका) | 1 माशा |
4. जवारिश जालीनूस वाला संयोजन
| क्रम | सामग्री | मात्रा |
|---|---|---|
| 1 | जवारिश जालीनूस | मात्रा स्पष्ट नहीं |
| 2 | शीरा बादयान | — |
| 3 | शीरा मुवैज़ मुनक़्क़ा | — |
| 4 | शीरा तुख़्में (?)* | हर एक 5 माशा |
| 5 | अर्क़े बादयान | 12 तोला |
| 6 | गुलकंद | 4 तोला |
| 7 | हब्बे किबरीत | 2-2 अदद (खाने के बाद) |
| 8 | माजूने नानख़ाह | 5 माशा (शाम को) |
5. नुस्खा-ए-हब्बे किबरीत
| क्रम | सामग्री | मात्रा |
|---|---|---|
| 1 | गन्धक आमला सार | साढ़े पॉच माशा |
| 2 | फिलफिले सियाह | साढ़े पॉच माशा |
| 3 | नमक तआम | पौने दो माशा |
(जिन नामों के आगे * लगा है, उनका सटीक आधुनिक नाम ग्रंथ से पुष्टि नहीं हो सकता)
⚠️ ज़रूरी बात: ये सारे नुस्खे pharmacy-level compounding (गन्धक, कई तरह के शीरे, जवारिश) से बनते हैं — ये घर पर खुद बनाने वाली चीज़ें नहीं हैं, किसी योग्य हकीम/यूनानी फार्मेसी से ही तैयार करवाना चाहिए।
गिज़ा व परहेज़ (खान-पान और सावधानियां)
भूख न लगना (Bhookh Na Lagna) की स्थिति में क्या खाएं:
- बकरी का शोरबा
- मूँग की दाल, अरहर की दाल
- मुर्ग़ का शोरबा
- मूँग की खिचड़ी
- शुरुआत में कम मात्रा में, धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाते जाएं
क्या नहीं खाएं:
- भारी, देर से हज़्म होने वाली चीज़ें
- गैस बनाने वाली (रियाह पैदा करने वाली) चीज़ें
- कब्ज़ न होने दें
अन्य सलाह: सुबह-शाम खुली हवा में हल्की सैर (चहल क़दमी) मुफ़ीद बताई गई है।
पारंपरिक जानकारी और आधुनिक दृष्टिकोण
पारंपरिक स्रोत क्या कहता है? ग्रंथ भूख की कमी के पीछे पेट की सूजन/ज़ख्म या भारी खाने को ज़िम्मेदार मानता है, और कारण के हिसाब से अलग नुस्खे व हल्के खाने की सलाह देता है।
आसान आधुनिक समझ: हल्का, आसानी से पचने वाला खाना और नियमित हल्की सैर — ये सुझाव आम पाचन-स्वास्थ्य सलाह से मेल खाते हैं।
क्या अभी पुष्टि नहीं की जा सकती? इस लेख के लिए उपलब्ध सामग्री मुख्य रूप से पारंपरिक ग्रंथ और Google search queries पर आधारित है। इसलिए यहां किसी आधुनिक वैज्ञानिक प्रभाव, क्लिनिकल असर या इलाज के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा रही है।
स्रोत संदर्भ
स्रोत: बयाज़े कबीर, जिल्द 1, पृष्ठ 196-198 — प्रदान की गई पुस्तक छवि के आधार पर। पारंपरिक यूनानी चिकित्सा पद्धति के बारे में अधिक जानकारी के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ यूनानी मेडिसिन (NIUM) जैसी संस्थाओं से संपर्क करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भूख कम लगती है तो क्या खाना चाहिए?
ग्रंथ के अनुसार हल्का, जल्दी हज़्म होने वाला खाना जैसे बकरी का शोरबा, मूँग-अरहर की दाल, मुर्ग़ का शोरबा और मूँग की खिचड़ी लेना चाहिए, धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाते हुए।
तेज़ी से भूख बढ़ाने के लिए क्या करें?
ग्रंथ कारण के हिसाब से अलग नुस्खे बताता है (ऊपर टेबल देखें), साथ ही हल्का खाना और सुबह-शाम खुली हवा में सैर करने की सलाह देता है। कोई भी नुस्खा शुरू करने से पहले हकीम से सलाह लें।
क्या ये नुस्खे कैंसर जैसी किसी गंभीर बीमारी में काम आते हैं?
ग्रंथ का ये पन्ना ऐसी किसी विशेष चिकित्सीय स्थिति का ज़िक्र नहीं करता। कैंसर या किसी भी गंभीर बीमारी में भूख की कमी के लिए संबंधित डॉक्टर/ऑन्कोलॉजिस्ट से ही सलाह लें।
महत्वपूर्ण चिकित्सा सूचना
ये लेख भूख न लगना (Bhookh Na Lagna) पर सिर्फ़ शैक्षणिक और सूचनात्मक मकसद से लिखा गया है। इसमें दी गई पारंपरिक जानकारी बयाज़े कबीर के जिन पन्नों पर आधारित है, उन्हें आधुनिक चिकित्सा निदान, इलाज या वैज्ञानिक प्रमाण के बराबर न समझें। इसमें बताए गए नुस्खे जटिल पारंपरिक फार्मेसी तैयारियां हैं जिन्हें घर पर खुद बनाने की कोशिश न करें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या, लगातार भूख न लगना, वज़न घटना, गर्भावस्था, दीर्घकालिक बीमारी या दवा के इस्तेमाल की स्थिति में, कोई भी नुस्खा लेने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या प्रशिक्षित हकीम से सलाह ज़रूर लें।

Mein zaro ajmaungi mujhe bhokh nahi lagti 😂